याद पुरानी
जी चावै के ! नाच ल्यूं ?
'कुल्हिया में हाथी'... एक विचार-जरा सोचिये, सृष्टि संवत --1972949125, कलियुगाब्द---5125, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा- विक्रमी संवत-2081
डॉ. कृष्ण के आर्य त्याग त्याग ही सेवा, त्याग कृपण, त्याग, त्याग का क्या कहना, त्याग ही सूरत, त्याग मूर्त, त्याग, त्याग है जीवन गहना। त...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें