'कुल्हिया में हाथी'... एक विचार-जरा सोचिये, सृष्टि संवत --1972949125, कलियुगाब्द---5125, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा- विक्रमी संवत-2081
सोमवार, 5 सितंबर 2011
Gayatri Mantra
Labels:
काव्य,
मुख्य पृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
For You
-
उठो बहना चीर सम्भालों, अब खुद ही तो लड़ना है। मर जाओ या मार गिराओ, अब किस से ड़रना है।। झूठ-मूठ के रिश्ते फरेबी, अब नही है कोई करीबी। जन...
-
खतरे में धरती भ गवान ने वायुमंडल को संतुलित रखने के लिए सभी जीवों को उनके कर्मों के अनुसार विभिन्न योन...
-
डॉ. कृष्ण के आर्य पलाश-एक दिव्य औषधी प्रकृति एक अनमोल खजाना है। ऋतु के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के फल, फूल, पौधे तथा पेड़ों प...
New Post
त्याग
डॉ. कृष्ण के आर्य त्याग त्याग ही सेवा, त्याग कृपण, त्याग, त्याग का क्या कहना, त्याग ही सूरत, त्याग मूर्त, त्याग, त्याग है जीवन गहना। त...