शुक्रवार, 26 जून 2026

विमोचन


डॉ. कृष्ण के आर्य

 विधानसभा अध्यक्ष ने किया ‘जीवन गीत’ का विमोचन

                    

हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविन्द्र सिंह कल्याण ने हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में ‘जीवन गीत’ काव्य संग्रह पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक का लेखन हरियाणा सरकार में जिला/सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी के पद पर कार्यरत डॉ. कृष्ण के आर्य ने किया हैं।
      विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि साहित्यकार समाज के मार्गदर्शक हैं, जो अपनी लेखनी से उत्कृष्ट इतिहास का सृजन करते हैं। उन्होंने कहा कि वह साहित्यकार ही होते हैं, जो मानव मात्र को प्राचीन इतिहास के छिपे रहस्यों से अवगत करवाते हैं। इससे हमारे समाज का उत्थान और सरकार को दिशा प्राप्त होती है। इस अवसर पर उन्होंने साहित्यकारों को पुरस्कार वितरित किए।

                  
                   

    पुस्तक के लेखक ड़ॉ आर्य ने कहा कि यह उनकी दूसरी पुस्तक है, जिसमें इकावन कविताओं का संग्रह है। इसमें देश प्रेम, सामाजिक ताना-बाना, कृष्ण भक्ति, पक्षियों की जीवन शैली, मानव जीवनचर्या तथा त्यौहारों पर आधारित कविताएं हैं। इनमें इंसान हूॅं, पक्षियों की दूनिया, चुप रहता हूं, पैसे पेड़ पर लगते हैं, चौकीदार, भाग मत, शब्द नहीं मिलते तथा तेरी मां जैसी सामाजिक सरोकारों की कविताएं शामिल हैं।
     डॉ. आर्य ने कहा कि उनकी पहली पुस्तक ‘कर्मयोगी कृष्ण’ है। इस पुस्तक को चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा बेस्ट बुक ऑफ द ईयर 2025 की सर्वश्रेष्ठ कृति का पुरस्कार प्राप्त है। इस पुस्तक में भगवान श्रीकृष्ण का अनुसंधानात्मक सम्पूर्ण जीवन चरित्र दिया गया है, जिसमें लगभग दो दर्जन पुस्तकों के संदर्भ सम्मिलित किए गए है। पुस्तक में ग्यारह अध्याय है, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण से पूर्व की 60 पीढ़ियों, उनकी शिक्षा, दिनचर्या तथा वास्तविक और मूल द्वारका सहित अन्य खंडों का विस्तार से वर्णन है।

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शुक्रवार, 12 जून 2026

त्याग


डॉ. कृष्ण के आर्य 

 त्याग

 



त्याग ही सेवा, त्याग कृपण,

त्याग, त्याग का क्या कहना,

त्याग ही सूरत, त्याग मूर्त,

त्याग, त्याग है जीवन गहना।

त्याग ही शासक, त्याग विरासत,

त्याग, त्याग में ही रहना,

त्याग ही कर्म, त्याग प्रारब्ध,

त्याग, त्याग से तुम सहना।

त्याग ही आकर्षण, त्याग विकर्षण,

त्याग, त्याग ही निष्कर्म कहना,

त्याग ही भाव, त्याग प्रभाव,

त्याग, त्याग के स्वभाव रहना।

त्याग ही तप, त्याग कोप,

त्याग, त्याग में नित रहना,

त्याग ही स्नेह, त्याग द्वेष,

त्याग, त्याग तूं मम् कहना।

त्याग ही शांति, त्याग क्रांति,

त्याग, त्याग तूं करते रहना,

त्याग ही जीवन, त्याग मोह,

त्याग, त्याग तेरा मत रहना।

त्याग ही हवन, त्याग समिधा,

त्याग, त्याग से करते रहना,

त्याग ही आहुति, त्याग स्वाहा,

त्याग, त्याग में बोलते रहना।

त्याग ही कर्म, त्याग काम,

त्याग, त्याग में स्थिर रहना,

त्याग ही धर्म, त्याग पिपाशा,

त्याग, त्याग की बात कहना।

त्याग ही मुक्ति, त्याग युक्ति,

त्याग, त्याग में पा जाना,

त्याग ही भक्ति, त्याग सूक्ति,

त्याग, त्याग में रत रहना।

त्याग ही प्रेम, त्याग परीक्षा,

त्याग, त्याग में मग्न रहना,

त्याग ईश है, त्याग लोभ,

त्याग, त्याग में ‘केके’ रहना।

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