शुक्रवार, 12 जून 2026

त्याग


डॉ. कृष्ण के आर्य 

 त्याग

 



त्याग ही सेवा, त्याग कृपण,

त्याग, त्याग का क्या कहना,

त्याग ही सूरत, त्याग मूर्त,

त्याग, त्याग है जीवन गहना।

त्याग ही शासक, त्याग विरासत,

त्याग, त्याग में ही रहना,

त्याग ही कर्म, त्याग प्रारब्ध,

त्याग, त्याग से तुम सहना।

त्याग ही आकर्षण, त्याग विकर्षण,

त्याग, त्याग ही निष्कर्म कहना,

त्याग ही भाव, त्याग प्रभाव,

त्याग, त्याग के स्वभाव रहना।

त्याग ही तप, त्याग कोप,

त्याग, त्याग में नित रहना,

त्याग ही स्नेह, त्याग द्वेष,

त्याग, त्याग तूं मम् कहना।

त्याग ही शांति, त्याग क्रांति,

त्याग, त्याग तूं करते रहना,

त्याग ही जीवन, त्याग मोह,

त्याग, त्याग तेरा मत रहना।

त्याग ही हवन, त्याग समिधा,

त्याग, त्याग से करते रहना,

त्याग ही आहुति, त्याग स्वाहा,

त्याग, त्याग में बोलते रहना।

त्याग ही कर्म, त्याग काम,

त्याग, त्याग में स्थिर रहना,

त्याग ही धर्म, त्याग पिपाशा,

त्याग, त्याग की बात कहना।

त्याग ही मुक्ति, त्याग युक्ति,

त्याग, त्याग में पा जाना,

त्याग ही भक्ति, त्याग सूक्ति,

त्याग, त्याग में रत रहना।

त्याग ही प्रेम, त्याग परीक्षा,

त्याग, त्याग में मग्न रहना,

त्याग ईश है, त्याग लोभ,

त्याग, त्याग में ‘केके’ रहना।

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