बुधवार, 1 नवंबर 2017

मै अकेला हूं !


          मै अकेला हूं !
          पर ये कैसे समझू,
          कि मै अकेला हूं !
माता की गर्भारी में,
पिता की समझदारी में,
और दादा की दुलारी में,
मैं अकेला हूं।
शहर की बाजारी में,
फूलों की बगियारी में,
और बीवी की बुखारी में,
मैं अकेला हूं।
शियारों की यारी में,
औरतों की पंचायरी में,
और सड़क पर सवारी में,
मैं अकेला हूं।
खटिया पर बीमारी में,
परेशानी व लाचारी में,
और शमसान की अगियारी में,
मैं अकेला हूं॥ 



                                                                                      कृष्ण कुमार ‘आर्य’

Krishana: मै अकेला हूं !

Krishana: मै अकेला हूं !

For You

New Post

मुद्रिका

 डॉ. कृष्ण के आर्य मुद्रिका ज्ञान- श्रीकृष्ण ने आचार्य सांदीपनी से कहा कि वह मुद्रा अथवा मुद्रिका का ज्ञान प्राप्त करना चाहता हैं। अतः मुझ...