डॉ. कृष्ण के ‘आर्य’ होली-विशेष
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'कुल्हिया में हाथी'... एक विचार-जरा सोचिये, सृष्टि संवत --1972949125, कलियुगाब्द---5125, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा- विक्रमी संवत-2081
डॉ. कृष्ण के ‘आर्य’ होली-विशेष
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डॉ. कृष्ण के आर्य
दयानंद बोध रात्रि- विशेष
डॉ. कृष्ण के. ‘आर्य’
नववर्ष पर विशेष
डॉ. कृष्ण के. आर्य
राष्ट्रीय गणित दिवस पर विशेष
गणित भारतीय ऋषियों की अमूल्य धरोहर
गणित एक अद्भूत विषय है, जिसे पढ़े तो कठिन लगता है और समझे तो आसान लगने लगता है। गणित की कठिनता का कोई पैमाना नहीं होता है। यह उस आकाश गंगा की भांति है, जिसमें जितनी गहराई तक चलते जाएंगे उतनी ही नई विशेषताओं को जानने लगते हैं। गणित जहां एक सागर की तरह गहरा है, वहीं महासागर की भांति अथाह है। इसे समझने के लिए यदि गहराई में उतरा जाएगा तो गणित की थाह पाना भी आसान हो जाता है।
गणित, जीवन का एक ऐसा पहलु है, जिसकी हमंे हर मोड़ पर आवश्यकता अनुभव होती है। यह केवल संख्याओं और आकृतियों का खेल नहीं है, बल्कि एक ऐसी भाषा है जो हमें प्रकृति और विज्ञान को समझने में मदद करती है। गणित समस्याओं के समाधान, तार्किक और विश्लेषणात्मक चिंतन विकसित करने में हमारी मदद करता है। यह हमें कठिन समस्याओं का समाधान ढूंढने की क्षमता प्रदान करता है। गणित केवल एकल विषय नहीं है, बल्कि ‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी’, भौतिकी, रसायन विज्ञान, इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी गणित की भूमिका महत्वपूर्ण है। दैनिक जीवन की समस्याओं का हल, समय प्रबंधन, बाजारवाद और दूरी की गणना इत्यादि सभी गणित के अनुप्रयोग हैं।
गणित के अनेक भाग है, जिन्हें समझकर विभिन्न क्षेत्रों में महारत प्राप्त की जा सकती है। यह केवल जमा-घटा तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह जीवन को सहज बनाने का मुख्य क्षेत्र है। इसके मुख्यः तौर पर निम्न श्रेणियों में समझा जा सकता है।
1. अंकगणित- इससे व्यक्ति जोड़, घटाव, गुणा, भाग जैसी मूलभूत क्रियाएं जान सकता है।
2. बीजगणित- यह एक रोचक विधा है। इससे गणित की कठिन पहेलियों, समीकरण, बहुपद और चर-अचर इत्यादि का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।
3. ज्यामिति- इसकी सहायता से विद्यार्थी आकृतियों, कोणों का परिमाप और क्षेत्रफल का अध्ययन कर सकता है।
4. त्रिकोणमिति- इसमें त्रिभुजों एवं अन्य आकृतियों के कोणों का माप इत्यादि के मध्य संबंधों का अध्ययन करना आसान होता है।
5. कैलकुलस- इसमें परिस्थितियों के परिवर्तन और उनकी गति का आंकलन करना आसान रहता है।
गणित न केवल एक विषय है, बल्कि एक कौशल है जो हमें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिला सकता है। गणित का करियर के तौर पर उपयोग सदैव लाभप्रद रहता है। वर्तमान दौर में डेटा साइंस, डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग और एआई जैसी आधुनिक विधाओं में गणित की महत्वपूण भूमिका है अर्थात् गणित के बिना इनकी कल्पना भी नही की जा सकती है। गणित ‘इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर’, सिविल, मकेनिकल तथा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में एक अहम् टूल के रूप में प्रयोग होता है। इतना ही नही, फिनटेक और एक्ट्यूरी बैंकिंग, निवेश और बीमा क्षेत्र की कल्पना गणित के बिना अधूरी है। इनमें गणितीय कौशल की हमेशा मांग है।
भारत भूमि पर गणितीयः समझ सृष्टि के आदि से रही है। सातवें मन्वतर के ऋषि मनु से लेकर भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण से लेकर आधुनिक गणितज्ञ इस विद्या को भली प्रकार से जानते थे। लगभग नौ लाख वर्ष पहले श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास काल की अवधि और उसकी सटीक गणना, पांडवों 12 वर्ष के वनवास और एक वर्ष अज्ञातकाल का आंकलन तथा वर्ष के सूर्य और चंद्रमास की जानकारी इस बात की द्यौतक है।
परन्तु महाभारत काल के पश्चात भी भारत भूमि पर अनेक गणितज्ञों ने समाज निर्माण में अपना योगदान दिया है। मगध की धरती पर लगभग 250 वर्ष ईसा पूर्व आचार्य चाणक्य ने एक महान ग्रन्थ ‘कोटिलीय अर्थशास्त्र’ की रचना कर हमारे महान गणितज्ञ होने का प्रमाण दिया है। आचार्य आर्यभट्ट, वराहमीहिर, ब्रह्मगुप्त, भास्करार्चाय तथा लीलावती जैसे गणितज्ञों ने गणित को विशेष पहचान दिलाई है। इतना ही नही, आधुनिक भारत के श्रीनिवास रामानुजन का नाम गणित के क्षेत्र में दुनिया को आश्चर्यचकित करने वाले महान गणितज्ञ के रूप में लिया जाता है। भारत में उन्हीं के जन्म दिन 22 दिसम्बर को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है।
महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन को मैथ्स का जादूगर कहा जाता है। आज उनकी 138वीं जयंती है। उनका जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु में हुआ था। हर साल उनकी जयंती पर नेशनल मैथमेटिक्स डे होता है। 33 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। अपनी छोटी से उम्र में उन्होंने दुनिया को 3900 से ज्यादा गणितीय सूत्र, प्रमेय और अनंत श्रृंखलाएं दीं, जिनमें π (पाई) के जरिए गणना सटीक और तेज हुई। वैज्ञानिक आज भी उनके अनेक प्रमेयों का हल निकालने में लगे हुए हैं। मान्यता है कि 12 साल की उम्र में गणित के प्रति उनकी दीवानगी इतनी थी कि वे त्रिकोणमिती में महारत हासिल कर चुके थे।
वर्तमान में जीवन हर क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। श्रीनिवास रामानुजन का आज के एआई साइंस में महत्वपूर्ण योगदान माना जा सकता है। न्यूरल नेटवर्क्स और मशीन लर्निंग की नींव रामानुजन के उन गणितय सूत्रों पर टिकी है, जिसकी वजह से सुपरकंप्यूटर, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी और एल्गोरिदम डिजाइन संभव हुआ।
अतः आज राष्ट्रीय गणित दिवस पर हमें बच्चों में गणित के प्रति लगाव और उसे समझने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
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हरियाणा राजभवन का नाम अब होगा लोकभवन हरियाणा
कृष्ण उवाचः हरियाणा में राजभवन का नाम बदलकर अब लोकभवन हरियाणा कर दिया है। ऐसा करने वाला हरियाणा देश का 10वां राज्य बन गया है। इस संबंध में जारी अधिसूचना 1 दिसंबर 2025 से लागू हो गई है।
हरियाणा के राज्यपाल प्रो0 असीम कुमार घोष के आदेश पर राज्यपाल के सचिव श्री दुष्मंता कुमार बेहरा आईएएस द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह निर्णय भारत सरकार के एक पत्रांक के आधार पर लिया गया है। अतः सभी आधिकारिक उद्देश्यों के लिए राजभवन हरियाणा का नाम अब लोकभवन हरियाणा कर दिया गया है।
उवाच-1