डॉ. कृष्ण के आर्य
पलाश-एक दिव्य औषधी
प्रकृति एक अनमोल खजाना है। ऋतु के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के फल, फूल, पौधे तथा पेड़ों पर रंगत देखी जा सकती है। इसी प्रकार पलाश एक तरह का पेड़ है, जिस पर बैसाख महीने में फूल चमकने लगते हैं। पलास के पेड़ के फूल सुंदर नारंगी रंग के होते हैं। यह देखने में अति सुन्दर और आग की तरह चमते दिखाई देते है। यह अति प्राचीन पेड़ है, जिसका वर्णन महाभारत काल में होता रहा है।
इसका सबसे अधिक विवरण पांड़वों के लाक्षागृह यात्रा के दौरान हुआ था। जब दुर्योधन और शकुनी द्वारा पांड़वों को लाक्षागृह में जलाकर मारने का षडयंत्र रचा था। उस समय विदुर जी ने इन्हीं पलाश के फूलों का उदाहरण देकर पांड़वों को आग से बचने के लिए सचेत किया था। इसी के परिणामस्वरूप पांड़व उस लाक्षागृह से सुरक्षित निकल पाए थे।
यह प्रकृति की अनूठी देन है। यह शुष्क मौसम में सूखे क्षेत्रों में ही पाया जाता है। इन फूलों का उपयोग युनानी, होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने में किया जाता है। चिकित्सकों की राय के अनुसार पलाश के पेड़ के लगभग सभी हिस्से औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं।
पलाश के लाभ
मानना है कि पलाश के पेड़ से कई तरह के रोगों का उपचार संभव है। इसकी जानकारी सामान्यतः कम लोगों को होती है।
मोतियाबिंद में फायदेमंद- चिकित्सकों का मानना है कि इनका उपयोग आंखों के मोतियाबिंद के उपचार के लिए किया जाता है। इसके फूलों का रस मोतियाबिंद के लिए बहुत उपयोगी बताया है।
त्वचा रोग- पलाश के पत्तों और इसके फूल को पीसकर चेहरे पर लगाने से त्वचा की रंगत निखरती है और त्वचा संबधी अनेक रोगों में आराम मिलता हैं।
दर्द में आराम- चोट, दर्द और सूजन को खत्म करने में भी पलास के फूल बहुत लाभदायक है।
मधुमेह- पलाश के सूखे फूलों का पाउडर मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करता है।
खांसी-जुकाम- इन रोगों में पलाश एक गुणकारी पौधा माना जाता है।
यह एक ऐसा पौधा है जिसके उपयोग से शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। इतना ही नहीं इसके फूलों का उपयोग होली के रंग बनाने में भी किए जाते हैं। परन्तु इसका उपयोग बीमारी से संबंधित चिकित्सकों के मत के अनुसार ही करना चाहिए।








