यह आलेख 16 मार्च को दैनिक जगत क्रांति और 21 मार्च 2010 को दैनिक ट्रिब्यून के अंक में प्रकाशित हुआ है.
नवरात्र बन सकते है नवप्रभात यदि...
.
'कुल्हिया में हाथी'... एक विचार-जरा सोचिये, सृष्टि संवत --1972949125, कलियुगाब्द---5125, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा- विक्रमी संवत-2081
बुधवार, 7 अप्रैल 2010
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
For You
-
क्या ? चल गई, चल गई, चल गई, दी खबर ये फैलाये, जानत, सुणत, भागत सब, पूछत भी कोई नाए. एक को देख दूसरा भागत, उसको देख भागत अनेक, भागत, भागत स...
-
होत है- 1. अ से बनता अकार है, उ से उकार होत है। म से मकार होवे है, ओउम् बने सब जोत है। 2. सु...
-
ठंडी हवा आज वो ठंडी हवा, उतनी ठंडी नही लगती। गंध तो बहुत है, पर अच्छी नही लगती।। बंसत के बाद फिर, गर्मी यूं कहर ढ़ाने लगती। ए.सी. ...
New Post
पलाश
डॉ. कृष्ण के आर्य पलाश-एक दिव्य औषधी प्रकृति एक अनमोल खजाना है। ऋतु के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के फल, फूल, पौधे तथा पेड़ों प...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें