गुरुवार, 29 अप्रैल 2010

डर लगता है


             ख़ुशी से
मुझे खुश होने से डर लगता है,
जो न पाया उसे खोने से डर लगता है
मेरे अश्क बनके तेज़ाब न जला दे मुझको,
इसलिए रोने से डर लगता है
महफ़िल में भी सन्नाटा सुनती  हूँ,
मुझे तनहा होने से डर लगता है
ख्वाब टूटकर चुभेंगे ज़िन्दगी भर,
मुझको सोने से डर लगता है
तुम्हारी याद काफी है मेरे लिए,
तुम्हारे साथ होने से डर लगता है
पता नहीं किस बात पे शर्मिन्दा हूँ,
मुझे अपने ज़िंदा होने से डर लगता है

                                                                      by Sonal Rastogi

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